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The Love - प्रेम

                                               The Love

 




 
              Love is the world's sweetest language. Which every language of the world can understand. God also has the greatest quality and man has also been given the same quality by God. It is written in the Bible, God is Love - Love is God. God is love, love is God.

          We all love. While doing this we are from all the people of the world, but we do not know the meaning of love yet, we have not yet come to love. There is always a feeling of giving inside love, there is no desire to achieve anything inside that love because love always teaches giving, but in the love we love, there is always a feeling of taking what I love if I do Will be achieved.

             The mother loves the child and thinks together that it will be my support if I grow up, do not I also love her selfishness. Brother loves brother, thinks he will support sadness. The sister loves her brother and thinks she will protect me. Husband and wife love each other. They think that they will be able to support each other and somewhere, our thinking is working behind every love, whereas love should have been selfless. Unselfish love was for Meera and Radha Krishna. Rama had selfless love with his subjects.

           It is said that when Ramchandra ji started going to exile, some elderly women came. When he touched Rama's feet, he blessed Rama. Take this because those women replied that Ram has given us a lot, now there is not even a desire to take blessings, so we are giving ourselves blessings.

                Have a good idea, we have some desire or some thought that is working behind whomever we love, that's why we have said that maybe we don't even know the meaning of love yet, the day we get to know On that day, the way to love will change with your children. With his parents. With close neighborhood. With the whole world. So let's learn the definition of love again and love selflessly.

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                                     प्रेम

           दुनिया की सबसे प्यारी भाषा है प्रेम. जिसे दुनिया की हर एक भाषा वाला समझ सकता है. भगवान का भी सबसे बड़ा गुण है और इंसान को भी वही गुण भगवान ने दिया है. बाइबल में लिखा है गॉड इज लव - लव इज गॉड. भगवान ही प्रेम है प्रेम ही भगवान है.
प्रेम हम सब लोग करते है. करते भी दुनिया के सभी लोगों से हैं लेकिन हमें प्रेम के अभी तक मायने ही नहीं पता हमें अभी तक प्रेम करना ही नहीं आया. प्रेम के अंदर हमेशा देने की भावना होती है उस प्रेम के अंदर कुछ भी हासिल करने की इच्छा नहीं होती क्योंकि प्रेम हमेशा देना सिखाता है लेकिन हम जो प्रेम करते हैं उसमें हमेशा लेने की भावना छुपी हुई होती है क्या  में  इससे प्रेम करूंगा तो मुझे क्या हासिल होगा.

 मां बच्चे से प्रेम करती है और साथ में सोचती है कि यह बड़ा होकर मेरा सहारा बनेगा क्या उसका प्रेम मैं भी स्वार्थ नही है. भाई भाई से प्रेम करता है सोचता है दुख सुख मैं साथ देगा. बहन भाई से प्रेम करती है सोचती है कि मेरी रक्षा करेगा. पति पत्नी आपस में प्रेम करते हैं. सोचते हैं एक दूसरे का सहारा बनेंगे कहीं ना कहीं हर एक प्रेम के पीछे हमारी सोच काम कर रही होती है जबकि प्रेम तो निस्वार्थ होना चाहिए था. निस्वार्थ प्रेम था मीरा का और राधा कृष्ण  का. निस्वार्थ प्रेम था राम का अपनी प्रजा के साथ.

कहते हैं जब रामचंद्र जी वनवास जाने लगे दो कुछ बुजुर्ग महिलाएं आई. उन्होंने राम के चरण छुए उन्होंने ही राम को आशीर्वाद दिया तो सीता कहने लगी की पैरवी यही छू रही हैं और आशीर्वाद भी वही दे रही है तो राम ने कहा तुम खुद ही पूछ लो इसका कारण तो उन महिलाओं ने जवाब दिया राम ने हमें बहुत कुछ दिया है अब तो आशीर्वाद लेने की भी इच्छा नहीं है इसलिए हम खुद ही दे रहे हैं आशीर्वाद प्रेम हमेशा देना सिखाता है कभी भी कुछ लेना नहीं सिखाता.

                 अच्छा विचार कर ले हम जिस से भी प्रेम करते हैं उसके पीछे हमारी कोई ना कोई इच्छा कोई ना कोई सोच जरूर काम कर रही होती है इसीलिए तो कहा है कि शायद हमें अभी तक तो प्रेम के मायने भी नहीं पता जिस दिन हमें पता चल जाएंगे उस दिन प्रेम करने का तरीका ही बदल जाएगा अपने बच्चों के साथ. अपने माता पिता के साथ. पास पड़ोस के साथ. पूरी दुनिया के साथ. तो चलो फिर प्रेम की परिभाषा को सीखते हैं निस्वार्थ होकर प्रेम करते हैं.

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